नवरात्रि में कन्या भोजन क्यों कराया जाता है?

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नवरात्रि में कन्या भोजन क्यों कराया जाता है?

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कुंवारी कन्याओं को माता का रूप माना जाता है। ऐसे में उन्हें नवरात्रि के दिनों में भोजन कराने और उपहार देने से मां दुर्गा प्रसन्न हो सकती हैं। ऐसा करने से आपके ऊपर उनकी कृपा बनी रहती है।

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कुंवारी कन्याओं को माता का रूप माना जाता है। ऐसे में उन्हें नवरात्रि के दिनों में भोजन कराने और उपहार देने से मां दुर्गा प्रसन्न हो सकती हैं। ऐसा करने से आपके ऊपर उनकी कृपा बनी रहती है।

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अगर आपको अपने घर में सुख-समृद्धि का वास चाहिए, तो आप नवरात्रि में कन्या भोजन करा सकती हैं। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती है और आपके घर में सुख-समृद्धि का वास हो सकता है।

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अगर आपको अपने घर में सुख-समृद्धि का वास चाहिए, तो आप नवरात्रि में कन्या भोजन करा सकती हैं। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती है और आपके घर में सुख-समृद्धि का वास हो सकता है।

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अगर आप नवरात्रि का व्रत करते हैं, तो आपको कन्या भोजन अनिवार्य हो जाता है। नवरात्रि में कन्या भोजन कराने के बाद ही व्रत करने वाला व्यक्ति अपना व्रत खोल सकता है। बिना कन्या भोजन के नवरात्रि व्रत पूर्ण नही माना जाता है।

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अगर आप नवरात्रि का व्रत करते हैं, तो आपको कन्या भोजन अनिवार्य हो जाता है। नवरात्रि में कन्या भोजन कराने के बाद ही व्रत करने वाला व्यक्ति अपना व्रत खोल सकता है। बिना कन्या भोजन के नवरात्रि व्रत पूर्ण नही माना जाता है।

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एक बार देवराज इंद्र ने माता दुर्गा को प्रसन्न करने का उपाय ब्रह्मा जी से पूछा था। ऐसे में उन्होंने बताया की नवरात्रि में व्रत करने, मां दुर्गा की पूजा करने और कन्या भोजन कराने से माता रानी प्रसन्न हो सकती है।

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एक बार देवराज इंद्र ने माता दुर्गा को प्रसन्न करने का उपाय ब्रह्मा जी से पूछा था। ऐसे में उन्होंने बताया की नवरात्रि में व्रत करने, मां दुर्गा की पूजा करने और कन्या भोजन कराने से माता रानी प्रसन्न हो सकती है।

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अगर आपको नवरात्रि में अपने घर में कन्या पूजन करनी है, तो इसके लिए विधि का ज्ञान का होना जरूरी होता है। कन्या पूजन में शुद्ध और सात्विक भोजन बिना लहसुन-प्याज के बनता है।

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अगर आपको नवरात्रि में अपने घर में कन्या पूजन करनी है, तो इसके लिए विधि का ज्ञान का होना जरूरी होता है। कन्या पूजन में शुद्ध और सात्विक भोजन बिना लहसुन-प्याज के बनता है।

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सबसे पहले 9 कन्या और 1 बालक को अपने घर पर बुलाएं और पैर धोकर बैठाएं। इसके बाद सभी कन्याओं और बालक का टीका करें और सिर पर माता की चुनरी ओढ़ाएं।

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सबसे पहले 9 कन्या और 1 बालक को अपने घर पर बुलाएं और पैर धोकर बैठाएं। इसके बाद सभी कन्याओं और बालक का टीका करें और सिर पर माता की चुनरी ओढ़ाएं।

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अब खाने की प्लेट लगाकर सभी को परोसें। खाना खत्म होने के बाद सबकी प्लेट खुद से उठाएं। इसके बाद सभी 9 कन्याओं को दक्षिणा और वस्त्र देकर विदा करें। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं।

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अब खाने की प्लेट लगाकर सभी को परोसें। खाना खत्म होने के बाद सबकी प्लेट खुद से उठाएं। इसके बाद सभी 9 कन्याओं को दक्षिणा और वस्त्र देकर विदा करें। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं।

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